Wednesday, 21 April 2021

Subah ki kiran (सुबह की किरण ) By shivam sandoo




सुबह की किरण 


वो शांत सा सा सागर है ,

शीश अपनी फैलाए हुए |

पंछियों की आवाजों से,

नींद से जगाते हुए ||

वह मनमोहक सी हवा अपने पास बुलाते हुए |

कितनी मनोहर है सुबह की किरण ||

 

वह गुमसुम सी हवाएं ,

वह गुमसुम से रास्ते |

वह मखमल से बादल,

वह कोमल सी सुगंधित हवाएं ||

हृदय को झंकारते हुए ,

सुरीली आवाजों में बुलाते हुए |

कितनी मनोहर है सुबह की किरण ||

 

वो नम सी भूमि है ,

बेशुमार मिट्टी की सुगंध |

दिल के दो तार को ,

शीत लहर देते हुए ||

चिड़ियों की चहचहाहट ,

मानो संगीत बज रही हो ||

मन को आकर्षित करते हुए ,

आवाज दे रही है |

कितनी मनोहर है सुबह की किरण ||

 

नदियों के किनारों पर ,

उजली किरण छाई हुई |

धीरे-धीरे मुस्कुराते हुए नरम दिल से बुलाते हुए ,

आवाज दे रही है ||

कितनी मनोहर है सुबह की किरण

 

दूर नभ में है छाई ,

उत्साह की बेशुमार दौलत |

केसरी सी चमक ,

दिख रही है गगन में ||

उत्साह का माहौल है ,

पंछी गीत गा रहे ||

धीमे धीमे हंसते-हंसते ,

आवाज दे रही है|

कितनी मनोहर है सुबह की किरण ||

       


ALL RIGHTS RESERVED 

S6 WRITERS COMMUNITY AND SHIVAM SANDOO

No comments:

Post a Comment

Humsafar : Ek Ajab Daastan By the rising estaar