सुबह की किरण
वो शांत सा सा सागर है ,
शीश अपनी फैलाए हुए |
पंछियों
की आवाजों से,
नींद
से जगाते हुए ||
वह
मनमोहक सी हवा अपने पास बुलाते हुए |
कितनी
मनोहर है सुबह की किरण ||
वह गुमसुम सी हवाएं ,
वह गुमसुम से रास्ते |
वह
मखमल से बादल,
वह
कोमल सी सुगंधित हवाएं ||
हृदय को झंकारते हुए ,
सुरीली आवाजों में बुलाते हुए |
कितनी मनोहर है सुबह की किरण ||
वो
नम सी भूमि है ,
बेशुमार
मिट्टी की सुगंध |
दिल
के दो तार को ,
शीत लहर देते हुए ||
चिड़ियों की चहचहाहट ,
मानो संगीत बज रही हो ||
मन
को आकर्षित करते हुए ,
आवाज दे रही है |
कितनी
मनोहर है सुबह की किरण ||
नदियों के किनारों पर ,
उजली किरण छाई हुई |
धीरे-धीरे मुस्कुराते हुए नरम दिल से बुलाते हुए ,
आवाज
दे रही है ||
कितनी
मनोहर है सुबह की किरण
दूर नभ में है छाई ,
उत्साह की बेशुमार दौलत |
केसरी
सी चमक ,
दिख रही है गगन में ||
उत्साह
का माहौल है ,
पंछी गीत गा रहे ||
धीमे धीमे हंसते-हंसते ,
आवाज दे रही है|
कितनी
मनोहर है सुबह की किरण ||
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