Monday, 19 April 2021

Ye kaisee nadanee hai (ये कैसी नादानी है ) By shivam sandoo

 


                        


      वह कहती है मै बारिश के बूंद हूं ,
       और वो उसमे भीगनी वाली परी....
       वह कहती है दुनिया को तो खुशी चाइए
       लेकिन मुझे हर खुशी में तुम।
       ये कैसी नादानी है
       कोई समझाता क्यों नहीं
 
        वह समंदर के किनारों पर इंतज़ार करती है|
       पर सामने आने पर आंखो से ओझल हो जाती है||
        वह फूलों के बागीचे  में मग्गन सी हो जाती है|
        पर पास आते ही उसके चहेरे की मुस्कान चली जाती है||
        ये कैसी नादानी है
        कोई उसे  समझाता क्यों नहीं
 
        वह संसार को देखती है|
        तो खाबो के समंदर में खो जाती है||
       खेतों के फसलों को देखकर ,उसका दामन खुशियों से 
    भर जाता है।
        कहीं बंजर भूमि देखी दिखी तो उसका मन उदास
    हो जाता है।
         मन तो यही करता है कि छूलूं |
        लेकिन पास आते ही आंखो  से ओझल हो जाती है||
        ये कैसी नादानी है
         कोई उसे समझाता क्यों नहीं
 
         सावन का महीना आते ही,
         चारो तरफ हवाओं में मृदंग बजते लगता है|
          वह सावन के झूलों के संग मस्त हो जाती है|
          लेकिन बात करने पर उसका जवाब नहीं देती है||
          ये कैसी नादानी है
          कोई उसे समझाता क्यों नहीं
 
          वह मेरे देश के लोगो को देखकर प्रसन्न हो जाती है|
          युवाओं के उज्जवल भविष्य की कामना करती है||
           कुछ ही क्षणों में निराश हो जाती है|
           वह कहती है तेरा देश मेरा देश है||
           फिर क्यों इतनी मायूसी छाई है?
           ये कैसी नादानी है
            उसे समझाता क्यों नहीं
 
          वह बादलों पंछियों और झरनों के संग बाते करती है|
         गेहूं के खेतों में मस्त सी हो जाती है||
         हवाओं के संग सांस में सांस मिलाकर लहराती है|
          कोयल के सुरो पर मधुर गीत गाती है,
          पास आते ही आंखो से ओझल हो जाती है||
          ये कैसी नादानी है
          कोई उसे समझाता क्यों नहीं
 
          वह अपने देश की माटी को अपने सलाखों पर रखती है|
           कहीं भी जाती अपने जज्बातों पर खरी उतरती ||
           उसके जैसा कोई नहीं फिर भी इतनी उदास क्यों रहती है|
           ये कैसी नादानी है
           कोई उसे समझाता क्यों नहीं
 
           वह प्रतिदिन नए उगते हुए सूरज को देखती है|
           वह उस रौशनी को देखती है जिसमें जीवन है||
           अंत में एक प्रश्न पूछ लेती है,
            एतना बखान क्यों करते हो मेरे इस प्रेम कहानी को?
           आखिर क्या रिश्ता है तेरा - मेरा?
            ये कैसी नादानी है
            कोई उसे समझाता क्यों नहीं
 
            ना जाने क्या रिश्ता है क्या नाता ,
            पर तेरी सुन्दरता को मुझे बाया करना आता है |
             दिल में क्या झरना मीठे पानी का सोता है ||

            ये कैसी नादानी है............

 

 

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